वसुधा मेरी रिक्त खेत पर तेरी इतनी दुष्टता मैं वृक्ष की अपत्य, संतान मैं पहाड़ों का, नदियों का... मेरी स्पर्श मात्र से दग्ध होता ये अनंत प्रज्वलित... मैं तेरी नहीं, मैं हूँ प्रकृति संतान... माँ, इ…
आस्था का पुल इस आस्था के पुल के बीच, मैं देखता हूँ खुद को ही खड़ा , एक ओर मोह है, भ्रम भरा विश्वास है दूसरी तरफ मगर प्रेम का साम्राज्य है , शाश्वत नियम ब्रह्माण्ड के यहाँ जगमगाते है । था जहाँ से मै…
महानुभाव चहरीया सर् (डॉ. गणेश्वर चहरीया जी के नाम) सादा जीवन, उच्च विचार यही था उनकी पहचान कलम से जिसने प्रकाश फैलाया जिसकी वाणी में था उजियारा जीवन की हर मोड़ पर निःस्वार्थ भाव से जिसने हमें चलना …
एक था राजकुमार सबसे अलग सबसे बेहतर... धीरे धीरे वो राजकुमार बन गया सुरों का सम्राट प्यार बढ़ने लगा क्योंकि राजकुमार था सबके दिलों का राजा प्यार, साहस, आत्मविश्वास था बुलंदियों पर छू लिया सबका द…
पगध्वनि अंधियारे की आवाज कोई नहीं सुनता क्योंकि... प्रकाश सबको भाती हैं बस रात कटें सबको पता है प्रकाश निरंतर बसता है... पर कोई नहीं सोचता कि अंधकार और प्रकाश के दरमियाँ है एक अंतरंग क्षण जब अंधकार…
उजाड़ ग्राम गाँव खाली हो गया खेत बंजर हो गए मचान टूट गए पेड़ों के पक्षी उड़कर चले गए कुँआ सूख गया । एक फूल का निशान भी बाकी न रहा धरती सूखकर फट गई, चारों ओर सूखा पड़ा हुआ है, मेरा बादल कहीं गुम ह…
अंतरराष्ट्रीय मेरी मां नदी की तरह वह निर्मल है शश्य की तरह वह मनोहर है मेरी मां को धारण करके मैं जा रहा हूं एक भविष्यहीन वर्तमान से दूसरे वर्तमान की ओर । मेरी सफर के आकाश में प्रतिवेशी और मित्रों क…
मूल : नीलमणि फुकन अनुवाद : मनबीनी दास ये एकमात्र शब्द ये एकमात्र शब्द है जिसका नाम है हरा जो परम ब्रह्म से उत्पन्न हुआ था उस शब्द में जीवन-प्रद है जिससे सूरज तक एक मार्ग है ह्रदय को हरियाली में प्र…
आजाद पंछी भारत के आजाद पंछी हैं हम, मिलकर बनाएं भारत को महान नदियाँ,लहरें, झरनें और पर्वत बीच में बसा हुआ हमारे भारत हरे-भरे हैं खेत हरियाली सबके दिलों में फैला दो खुशहाली। ज्ञान-विज्ञान और प्रयु…
आवभगत वो आए थे पेड़-पौधा बनके इमारत के लिए उसको टुकड़े-टुकड़े किया इमारत में अभी ऑक्सीजन रहते नहीं ! वो आए थे निरपेक्ष बनके खातिरदारी की बजाय हमने उसको बाँट लिया हिन्दु - मुस्लिम -ईसाई गुम हो गया व…
मोक्ष मैं बुद्ध तो नहीं फिर... मोक्ष की अपेक्षा क्यों ! निर्वाण की व्यर्थ कामना से सदमार्ग की प्राप्ति फिर बुद्धत्व तक सफ़र करते भटकता मुर्ख। अष्टमार्ग पर चलना, मन्त्रमुग्ध होना, मेरी कर्म से जुड़ा…
मेरी देवी मेरी माँ मैं वह चित्रकार नहीं जो तुम्हारा चित्र बना सकूँ जितनी कोशिश मैं करूँ उतनी बार नाकामयाब हो जाऊँ तेरी चमक के सामने मेरा हर रंग फीका पड़ता है तुम्हारी मुस्कान के सामने मेरी सारी कला…
चोर की टाँगे जलेबी की रेडी पर शाम को गई थी, बच्चों ने जलेबियाँ मंगाई थी, मैं खड़ी जलेबियाँ पकते देख रही थी तब विचार आया हम सब जलेबी ही तो है... आड़े-तिरछे, गोल-घुमावदार, मीठे रस भरे, सब कुछ हैं ह…
शरीर के अंग आँखों से देखो चंदा मामा कानों से सुनो बात हाथों को रखो सदा सफाई मुँह में मुस्कुराहट | सर को रखो सदा शांत नाक से लो सांस मन का सपना जो भी हो जमीन पर रखो पाँव। जुनमणि दास हिंदी शिक्षक…
रावण मैं रावण... हर तरफ केवल मैं ही मैं हूँ मुझे जलाने को तुम्हारी ये बैचेनी, तुम्हारी ये उतावला मुझे जलाने की होड़ लगी पर... तेरी इस मुखौटे के पीछे मैं सदैव जिंदा था जिंदा हूँ जिंदा रहूंगा... मुझे…
मैं भूमि हूँ मैं भूमि हूँ सबका पालन-पोषण करती हूँ सबका ख्याल रखती हूँ मैं भूमि हूँ । दु:ख कष्ट सहती हूँ सबका बोझ उठाती हूँ मैं भूमि हूँ । धीर सहनशील होकर हमेशा शांत रहती हूँ अपनी गोदी में लाखों गंद…
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