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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस | Hindi Article by Banashri Kalita


राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

 

भविष्य में वह अनपढ़ नहीं होगा जो पढ़ना पाए,

अनपढ़ वो होगा जो ये नहीं जानेगा की सीखा कैसे जाता है”- अल्विन टोफ्फलर


शिक्षा समाज का महत्वपूर्ण अंश है। ये व्यक्ति की अन्तर्निहित क्षमता तथा व्यक्तित्व को विकसित करते है। सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को शिक्षा शब्द का विस्तृत तथा व्यापक रूप माना जाता है। यह शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के मुताबिक, शिक्षा के व्यापक लक्ष्य हैं – बच्चों के भीतर विचार और कर्म की स्वतंत्रता विकसित करना, दूसरों के कल्याण और उनकी भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना और बच्चों को नयी परिस्थितियों के प्रति लचीले और मौलिक ढंग से पेशआने में मदद करना | जिस तरह हर एक महत्वपूर्ण दिन को एक विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है, उसी तरह हमारे देश में शिक्षा दिवस भी मनाया जाता है । हमारे देश में 11 नवम्बर के दिन शिक्षा दिवस मनाया जाता है। इसी दिन हमारे भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद (सन् 1888 के 11 नवम्बर) का जन्म हुआ था ।

मौलाना अबुल कलाम आजाद बड़े ही शान्त स्वभाव तथा उच्च विचारवाले व्यक्ति थे। वे गांधीवादी विचार धारा से प्रेरित थे । उनका वास्तविक नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था। उन्होंने हमेशा शिक्षा और संस्कृति के मेल पर जोर दिया था। जब भारत, पाकिस्तान के बँटवारा हुआ था, तब इन्होंने इसका विरोध किया। खिलाफत आन्दोलन में वह महात्मा गाँधी के सम्पर्क में आए थे और गांधीजी के असहयोग आन्दोलन में भी उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया था | वह सबसे कम उम्र (35) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे |

सन् 1947 से 1958 तक मौलाना आजाद भारत के शिक्षा मंत्री रहे। इसी दौरान इन्होंने बहुत सी शिक्षानुस्थाान की स्थापना की। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की स्थापना का श्रेय इनको ही जाता है। इसी महान शिक्षानुभव की स्मृति में सन 2008 के 11 नवम्बर से उनके जन्मदिन को पुरे भारतवर्ष में 'राष्ट्रीय शिक्षा दिवस' के रूप में मनाया जाता है ।

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बनश्री कलिता (सहकारी शिक्षयित्री) 

1 नम्बर जियाकुर आंचलिक मध्य इंराजी विद्यालय

छयगॉव शिक्षाखंड

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