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राष्ट्रीय कन्या दिवस । Hindi Article by Vandana Sharma

 ----राष्ट्रीय कन्या दिवस----


जब जब जन्म लेती है बेटी,

खुशियाँ साथ लाती है बेटी ।

ईश्वर की सौगात है बेटी, 

सुबह की पहली किरण है बेटी ।

तारों की शीतल छाया है बेटी,

आंगन की चिड़िया है बेटी ।

त्याग और समर्पण सिखाती है बेटी,

नये नये रिश्ते बनाती है बेटी ।

जिस घर जाये, उजाला लाती है बेटी,

बार बार याद आती है बेटी ।

           राष्ट्रीय कन्या दिवस की शुरूआत २४ जनवरी,२००९ से की गई है । सन १९६६ में इसी दिन 'इंदिरा गांधी' जी ने भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी । इसी कारण २००९ से इस दिन को राष्ट्रीय कन्या दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस अवसर पर सरकार की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । महिला एवं बाल विकाश विभाग अपने स्तर पर समाज में बाल कन्याओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए विभिन्न क्रियाकलाप करती है । इस दिवस को मनाने का उदेश्य देश में बालिकाओं के साथ होनेवाले भेदभाव के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

         भारत देश की यह एक बड़ी समस्या है कि यहाँ हम बालिकाओं को तो देवी दुर्गा की रूप में कन्या पूजन जैसे धार्मिक अवसरों पर पूजन करते हैं, लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेने से माहौल मातम सा बना लेते हैं । अभी भी हरियाणा और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में तो बच्चियों को अभिशाप तक माना जाता है । वह भूल जाते है कि वह उस देश की नागरिक है, जहाँ रानी लक्ष्मीबाई, कनकलता, मुला गाभरु जैसी विरांगनाओं ने समाज के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए | इसके अलावा भारत देश की ही राजनीति की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री का रुतबा माननीया इंदिरा गांधीजी ने कोई अवसरों पर देश के सामने एक दृढ़ संकल्पी  नेतृत्व प्रदान किया था । जो लोग कन्याओं को बोझ मानते है, उन्हें ही सही रास्ते पर लाने और कन्या शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए हर साल २४ जनवरी को राष्ट्रीय कन्या दिवस मनाया जाता है ।

        आज की बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है । खेल, राजनीति, घर, फ्लिम, उद्योग आदि सभी में अपना हुनर दिखा रही है । खेलों की दुनिया में अगर साइना नेहवाल, लभलीना बरगोहांई, मीरा बाई चानू, मेरी कम जैसी लड़कियाँ अपना हौसला दिखा रही हैं तो वहीं कोई अन्य स्तरों पर अनेक लड़कियाँ समाज की मुख्यधारा में अपना रुतबा बढ़ा रही हैं । स्वस्थ और शिक्षित कन्याएँ आनेवाली समय की मुख्य जरुरत है , क्योंकि वही लड़कियाँ आनेवाली समाज को सही राह दिखा सकती हैं । एक बेहतरीन पत्नी, माँ, कर्मचारी, नेता या अन्य क्षेत्र में यह अपने योगदान से देश की विकास में सहायक साबित होंगी ।

        यह तभी संभव होगा जब देश में कन्या जन्मदर में इजाफा होगा । भारत में अगर लिंग अनुपात देखा जाये तो बेहद निराशाजनक है । सन २०११ में हुई जनगणना के हिसाब से भारत में १००० पुरुषो में ९४० है । अगर हम राजस्थान और हरियाणा जैसे स्थानों पर नजर डालें तो वहाँ हालात बेहद भयावह हैं, राजस्थान में ८७७, पंजाब में ८९३, कुरुक्षेत्र में ७७०, छंडीगढ़ में ८१८, हरियाणा में  ७८४ है । लेंसट पत्रिका (Lancet journal ) में छपे एक अध्यपन के निष्कर्ष के अनुसार वर्ष १९८० से २०१० के बीच गर्भपातो की संख्या ४२ लाख से एक करोड़ २१ लाख के बीच रही है । साथ सेंटर फॉर सोशल रिसर्च का अनुमान है की बीते २० वर्ष में भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कारण एक करोड़ से अधिक बच्चियाँ जन्म नहीं ले सकी ।

         भारत में कुछ जगह पर एक ऐसी मानसिकता है कि बेटे संपति हैं और बेटियाँ कर्ज । बालिकाओं की हत्या के लिए  सबसे बड़ा कारण है दहेज प्रणाली, जिसकी बजह से लाखों कन्याएँ जन्म लेने से पहले ही कोख में मार दी जाती हैं ।

        कन्या भ्रूण हत्या बंद करने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी स्त्रियों को जागरूकता होनी है । साथ ही शिक्षा व्यवस्था ऐसी बनानी होगी की बच्चों को लड़का-लड़की के बीच किसी तरह के भेदभाव का आभास न हो, वे एक दूसरे को समान समझें और एक जैसा व्यवहार करें।

       कभी कभी कई परिजन अपनी बच्चियों को पैदा होने के बाद घर के कार्य संभालने के कार्य प्राथमिकता से करने की हिदायत दी जाती है । कभी कभी अगर घर से सही माहौल मिल भी गया तो समाज की उस गंदी नजर से वह खुद को बचाने के लिए संघर्ष करती हैं। राहें चाहे कितनी भी मुश्किल हों लेकिन हमें  यह याद रखना चाहिए कि हर रात के बाद सवेरा होता ही है । आज चाहे बालिकाओं के विकास के कार्यों में हजारों बाधाएँ हैं, लेकिन समाज और सरकार सही कदम उठाएँ तो हालात अवश्य बदलेंगे । सरकार सही कदम उठाने कि कोशिश भी कर रहा है । बालिकाओं की सही विकास के लिए वर्तमान सरकार नयी नयी सरकारी योजना बना रहा है, ताकि आगे जा के बालिकाओं का भविष्य  सुरक्षित रहें । हम सभी अगर बेटे की तरह बेटी को भी कर्ज के बदले घर की लक्ष्मी समझें और बेटे की तरह सम्मान दे, तो, कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार आदि जटिल मसला आसानी से दूर होंगे और आनेवाला समय भारत में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखेगा, जिसमें आज की बालिकाओं की बेहद अहम भूमिका होगी।

श्री वन्दना शर्मा
लेखक का पता:

श्री वन्दना शर्मा
सहकारी शिक्षिका

सत्रपरा आइडियल हाईस्कूल

शिक्षाखंड : रामपुर, कामरूप

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