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शरद प्रेम l Hindi Poem by Manbini Das

 शरद प्रेम


गुलाबों सी महक वर्षा देकर चली

हरियाली सी खुशबू भादो-आश्विन-कार्तिक लेकर आयी । 


रात की चमेली से चाँदनी निकल आयी

मन की मंदिर में आशा की किरणें लायी ।


सुबह हो या शाम, बकुल सी प्रसन्न चित्त 

हृदय को  मधुर मुरली से भरने आयी रात ।


आकाश का काले बादल गुम हो गयी 

दबी हुई सपनें को जगाने शरद पूर्णिमा आयी ।


ओस की बूंदों से जगमगातें प्रकृति रानी 

वही सौन्दर्य मानव के ज्ञान में निर्मलता लायी ।

मनबीनी दास l

घटनगर मध्य इंराजी विद्यालय l

शिक्षाखंड : छयगांव, कामरूप l






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