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হিন্দী প্ৰবন্ধ l विश्व ग्रंथ दिवस l बन्दना शर्मा l ৫ম বছৰ- ৩য় সংখ্যা

 विश्व ग्रंथ दिवस



हमारे सच्ची साथी हमसफर 
हैं पुस्तक 
ज्ञान, अनुभव, जीवन का श्रेष्ठतम 
आधार है पुस्तक 
जीवन सुखमय, बेहतर संसार 
बनाने के लिए 
सच्चा हमजोली 
है पुस्तक ।

विश्व पुस्तक दिवस जिसे विश्व ग्रंथ दिवस के रूप में भी जाना जाता है, पढ़ने और प्रकाशन को बढ़ावा देने के लिए युनेस्को  द्वारा आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम है ।
२३ अप्रैल १५६४ को महान लेखक विलियम शेक्सपीयर जी का मृत्यु हुआ था, उनकी कृतियाँ विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ । उन्होंने अपने जीवन काल में करीब ३५ नाटक और २०० से अधिक कविताएं लिखी । साहित्य जगत में शेक्सपीयर को जो स्थान प्राप्त है उसी को देखते हुए युनेस्को ने १९९५ से और भारत सरकार ने २००१ से २३ अप्रैल के दिन को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की ।
कहते हैं कि किताबें ही लोगों का सच्चा मित्र होता हैं । किताबों के बारे में जो लिखा है वह बहुत उल्लेखनीय और 
विचारोत्त्तोजक है । मसलन टिनी मोरीसन ने लिखा है - "कोई ऐसी पुस्तक जो आप दिल से पढ़ना चाहते हैं, लेकिन जो लिखी न गई हो तो आपको चाहिए कि आप ही इसे जरूर लिखें ।

वास्तव में किताबों के जरिए बहुत से कार्य जेसे ज्ञान, मनोरंजन और अनुभव की बात प्रकाशित होती है । किताबों के पन्नों पर जीवन का हर अर्थपूर्ण अनुभव सहेज लिया जाता है, ताकि आने वाला कल और भी सुन्दर बन सके । भारत में पुस्तक के जरिए पढ़ाने को बढ़ावा देने के लिए सर्वोदय साहित्य भंडार की स्थापना खुद आचार्य विनोबा भावे जी ने १९६० में की थी । यहाँ महात्मा गांधी और विनोबा भावे की किताबों के अलावा भारतीय ज्ञानपीठ की किताबें प्रमुखता से उपलब्ध हैं । यहाँ चुनिंदा रचनाकारों व प्रकाशकों की ही पुस्तकें रखी जाती है । इस साहित्य भंडार का उद्देश्य है युवाओं को ज्ञानवान, संस्कारित और चरित्रवान बनाना ।
१९६१ से संचालित श्री अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय में लगभग ६५ हजार किताबें है । यहाँ पावलो पिकासो और एम. एफ. हुसैन के चित्रों की संकलित करती किताबें भी है । साथ ही यहा पर भारत का संविधान, हिस्ट्री ऑफ़ इंग्लैंड, इंडियन आर्ट इन अमेरिका, जवाहरलाल नेहरू के भाषण का संग्रह, हिंदी और रुसी शब्दसागर, इंसाइकिलॉपीडिया (encyclopedia) ब्रिटेनिका, चिल्ड्रन आदि अनेक दुर्लभ और कीमती किताबें हैं ।
दिल्ली कॉलेज की पुस्तकालय काफी समृद्ध है । यहाँ १२० पुस्तकें ऐसी हैं जो दुर्लभ और बेशकीमती हैं । जैसे - हिस्ट्री ऑफ़ हिंदुस्तान के ३ भाग, ब्रदर्स ऑफ़ एशिया के 7 भाग, इन इंडिया 1911 इं से १९१२. यहाँ ५ भागों  में महाभारत और दो भागों में रामायण भी है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितनी पुरानी किताबें हैं ।
महात्मा गांधी पुस्तकालय (सेंट्रल लाइब्रेरी) में करीब २८५४५ पुस्तके हैं । यहा हर आयुवर्ग की पसंद और आवश्यकता  अनुसार किताबें मिलते हैं ।
दिल्ली कॉलेज की ग्रन्थपाल सायरा बानो कुरैशी बताती है कि किताबों का क्रैज कभी कम नहीं हो सकता । जिन्हें पुस्तकों में दिलचस्पी है, वे किताब पढ़े बिना संतुष्ट नहीं होते, भले ही किताब में लिखी बात अन्य मीडिया के माध्यम से वे जान चुके हो ।
विश्व ग्रंथ दिवस पालन करने का उदेश्य है पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना तथा पुस्तकों के महत्व और उनके प्रति सम्मान को बढ़ावा देना, साथ ही साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देकर लेखकों और प्रकाशकों के कार्यों को प्रोत्साहित करना । लेकिन आजकल शिक्षित समाज में कुछ लोगों को देखा जाता है कि वे बच्चों को ग्रन्थमेला में ले जाते है लेकिन पुस्तक की बारे बताने, ग्रंथ खरीदने के बदले वहा पे लगे मेले में काफी दिलचस्पी रखते हैं ।
ग्रंथ के प्रति जागरूकता का अर्थ है पुस्तकों के महत्व, उपयोगिता और संरक्षण के प्रति सचेत रहना । यह जागरूकता हमें पुस्तकों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। ग्रंथ के प्रति जागरूकता बढ़ाने से हम न केवल अपनी ज्ञान की प्यास बुझा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान के द्वार खोल सकते हैं ।


बन्दना शर्मा
हिंदी शिक्षिका
सत्रपरा आइडियल हाई स्कूल
शिक्षाखंड : रामपुर

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