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হিন্দী কবিতা l उजाड़ ग्राम l बबिता हजारिका डेका l ৫ম বছৰ- ৩য় সংখ্যা

 उजाड़ ग्राम


गाँव खाली हो गया 
खेत बंजर हो गए 
मचान टूट गए
पेड़ों के पक्षी उड़कर चले गए
कुँआ सूख गया ।
एक फूल का निशान भी बाकी न रहा
धरती सूखकर फट गई,
चारों ओर सूखा पड़ा हुआ है,
मेरा बादल कहीं गुम हो गया
और पीछे , मेरा गाँव उजड़ गया ।

बबिता हजारिका डेका
छयगाँव चम्पकनगर गर्ल्स हाईस्कूल
शिक्षाखंड : छयगाँव

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