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হিন্দী কবিতা, महानुभाव चहरीया सर्मा, डॉ. गणेश्वर चहरीया जी के नाम, मालव्य दास, ৬ষ্ঠ বছৰৰ ২য় সংখ্যা,

 महानुभाव चहरीया सर्

(डॉ. गणेश्वर चहरीया जी के नाम)



सादा जीवन, उच्च विचार

यही था उनकी पहचान

कलम से जिसने प्रकाश फैलाया

जिसकी वाणी में था उजियारा

जीवन की हर मोड़ पर

निःस्वार्थ भाव से जिसने

हमें चलना सिखाया...

आपके विचारों की ज्योति ने

अज्ञानता से शिक्षा तक

नई उम्मीद जगाई...

आप है करूणा के पुजारी,

आपकी शब्दों में आशीष...


हे महानुभाव,

आपको कोटी कोटी नमन...




मालव्य दास

हिंदी शिक्षक

छयगाँव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय

शिक्षाखंड : छयगाँव

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