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कविता

 कृष्ण



कृष्ण तेरे अनेक रूप
यशोमती मैया के दुलारे हो
राधा की अनन्य प्रेमी
मीरा की आराध्य
जग के तुम स्वामी
सुदामा की श्रेष्ठ सखा
भक्त वत्सल तेरा स्वरूप
कण कण में है तू बसा
प्रभु, तेरी कृपा से है
सारी उजियारा
तुम्हीं से सिखा सन्मार्ग
कर्म से मोक्ष की ओर..
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मालव्य दास
हिंदी शिक्षक
छमरीया हाईस्कूल
शिक्षा खंड : छमरीया

जिला : कामरुप

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